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|| शनिवार संवाद || 30-12-2023

 हम साल के अंतिम सप्ताह में भी बाजार में भारी उथलपुथल चल रही है | पर पहले इस वक़्त हम बाजार की गिरावट और स्थिरता की बात करते थे | इस साल हम  बढ़त की बात करते है | बाजार लगातार बढ़  रहा है और इसके ऊपर साल अंत और आने वाले चुनाव का कोई असर नहीं पड  रहा है |  इसके लिए कई कारक है, लगातार सुधर कार्यक्रम जो पिछले दस साल से चल रहे , अब ये एक सतत प्रक्रिया बन गयी है | इसका व्यापक हमे अर्थव्ययवस्था पर दिख रहा है |  पिछले साल हम रूपये को अंतर्राष्ट्रीय व्यापर की मुद्रा बनाने की कोशिश कर रहे थे पर उसमे हमे सफलता नहीं मिली | पर अब न सिर्फ हम UAE  से क्रूड खरीद के लिए रुपये का इस्तेमाल   करेंगे वरन अन्य ट्रांसक्शन्स में भी  | तथा UPI से सीधे पेमेंट भी कर सकते है, मुक्त व्यापर समझौता का असर इस पर भी पड़ेगा तथा ये एक तरह से अन्य देशो को भी प्रेरित करेगा हमसे रूपये में आपसी व्यापार  करे जिससे उन्हें डॉलर की जरुरत नहीं रहेगी जिससे उन्हें इम्पोर्ट सस्ता पड़ेगा|  69 देश हमसे रूपये में व्यापार करने के लिए राजी हो गए है  ये हमारे लिए अच्छी शुरुआत है...

|| शनिवार संवाद ||16-12-2023

 संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यावरण या जल वायु सम्बन्धी कार्यशाला cop 28  UAE में संपन्न हुई |  अगर हम इसके पहले के कार्यशाला के परिणामो को देखते है  तो कोई खास फायदा नहीं दीखता वरना  उसमे अड़ंगा लगाते हुए विकसित देश दीखते है |  पिछले 50 साल को देखते है तो पर्यावरण का नुकसान विकसित देशो ने किया,  न की अविकसित या विकासशील देशो ने | आज भी यूरोप अपनी जरुरतो की पूर्ति अफ्रीका का दोहन करके पूरी करता है | इनका रवैया पहले और अभी भी ऐसा  ही है और ये चाहते है की पर्यावरण के नुकसान की भरपाई विकासशील और अविकसित देश करे |  आज पृथ्वी का तापमान १* से बड़ा है तो इसमें विकसित देश ही जिम्मेदार है न की अन्य देश | पर इसकी कीमत पूरी दुनिया भुगत रही है | पर प्रयास बंद नहीं होने चाहिए क्युकी जिम्मेदारी न होने पर भी कीमत हम चूका रहे है |  अब हम COP 28  की घोषणा की तरफ देखे तो ये देखते है की कमिटमेंट ज्यादा नज़र आती है सब कार्बन उत्सर्जन कम करने की जिम्मेदारी उठाने को तैयार दीखते है | भारत की बात करे तो हम सन 2070 तक कार्बन न्यूट्रल हो जायेंगे | हमने अभी से इथेन...

|| शनिवार संवाद || 09-12-2023

 शादियों का मौसम चल रहा है और हम सब अपने परिजनों मित्रो तथा परिचितों की शादियों में सम्मिलित  भी हो रहे है | इसका अगर हम आर्थिक आकलन करे तो इसका असर बहुत है | वैसे तो हम भारतीय अपने संस्कार को सँभालते है| और इसपर गर्व भी करते है क्युकी ये वंशानुगत है  |  हम अपने सोलह संस्कारो के अनुसार अपने अपने जिंदगी को जीते है और ये पुरे भारत में एक जैसे ही है बस जगह के अनुसार इसमें थोड़ा बदल होता है करने की पद्धति में | उसमे शादी एक महत्वपूर्ण संस्कार है  जिसमे न सिर्फ परिवार रिश्तेदार वरन समाज भी शामिल होता है |  २४ दिसंबर तक कुछ तीन लाख शादिया एनसीआर में होनी है और पुरे देश में ३८ लाख होंगी | अगर हम इसका आकलन करे तो इसका असर बहुत है | सिर्फ और सिर्फ हम महिलाओ के सौंदर्य प्रसाधनों पर होने वाले खर्च को देखे तो भी उससे होने वाली आर्थिक गतिविधि का अनुमान लग जाता है | हमारे लिए शादी सिर्फ एक सेलिब्रेशन नहीं वरन यह एक तरह का उत्सव होता है |  अब इसका आकलन करे तो हम पाएंगे पूरा का पूरा असर व्यापक पड़ता है इसमें अलग अलग लोग या संस्था  कार्य करते है और इनकी पूरी टीम ल...

|| शनिवार संवाद || 02-12-2023

अब तक हमने देखा हमारा व्यवहार का बदलाव जो की नोटबंदी के बाद आया. हमारी सोच भी बदली है, हम और देश दोनों बदल रहे है|  जरा देश मे आये बदलाव पर नज़र मारते है तो हम पाते  है की अर्थयवस्था बढ़  रही है  और इसका असर भी अब दिख रहा है |  टैक्स to जीडीपी का अनुपात बढ़  रहा है और  GST संग्रह २०१७ से सतत बढ़ रहा है | हमारा GDP का आकार २०१६ से बढ़ रहा है, और हम दुनिया की न सिर्फ बढ़ते हुई अर्थव्यवस्था है वरन हम आज 5 वि बड़ी अर्थव्यवस्था  है और 4 बड़ी इकॉनमी बनने की रहा पर है|  हम जल्द ही इस पायदान पर होंगे की दुनिया  की ३र्ड बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेंगे | आज हमारी अर्थव्यवस्था जो की काला  धन की व्यवस्था थी वो ध्वस्त हो रही है | जितना इकोनॉमी फॉर्मल होगी उतना ही फायदा सब को होगा क्युकी सिस्टम मे तरलता बढ़ती जाएगी और पैसे का प्रोडक्टिव इस्तेमाल होगा |  आज भारत और भारतीय नागरिक आपस में ज्यादा नजदीक हो गए है, सबको देश अपना लगने लगा है | असेट क्रिएशन जो की अब तक कागजो पर था वो धरती पर उतर रहा है | योजनाए वक़्त पर पूरी हो रही है और उसका लाभ सबको मिल रहा है |...

||शनिवार संवाद || 25-11-2023

पिछले हफ्ते हमने देखा नोटबंदी करने के बाद हममे जो बदलाव आया है उसपर चर्चा करते है | आज हम डिजिटल इकॉनमी की तरफ बाद रहे है | हम आज सबसे ज्यादा डिजिटल ट्रांसक्शन करते है, इसका असर ये है की हमने नगदी रखना कम  कर दिया है | उदाहरण की तौर एक छोटा सी बात बताते है, २०१६ मे कानपूर की स्टेट बैंक दैनिक नगदी हैंडल करती थी वो रकम थी २०० करोड़, चेक से पेमेंट करीब १५० करोड़ और डिजिटल पेमेंट १० करोड़|  नोटबंदी के बाद ये रकम करीब करीब  उलटी हो गयी नगदी १०० करोड़ और डिजिटल पेमेंट ५० करोड़ हो गयी,उस वक्त डिजिटल पेमेंट हमारे देश में नयी थी और हम उससे ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते थे | आज नगदी का प्रचलन न के बराबर हो गए और डिजिटल पेमेंट अब घर घर की आम बात हो गयी है | कोई भी भारतीय नागरिक आज डिजिटल पेमेंट से अनजान नहीं है, और ये इतना आसान है की इसका इस्तेमाल सब करते है|  ये एक छोटा सा उदहारण है, हममे ये बदल हो गया और हम इसमें इतना रम  गए है की अब ये हम सब की जिंदगी का एक भाग बन गया है बिना किसी प्रयास और पॉजिटिव चेंज है की हम टैक्स पेमेंट करना सिख गए है | पालिसी बनाना अब आसान हो गया है क्योकि...

|| शनिवार संवाद || 18-11-2023

 अभी पिछले हफ्ते सात साल हो गए नोट बंदी को। अब इस निर्णय की समीक्षा  समय समय होती रही है।  नोट बंदी का व्यापक असर हमारी जिंदगी में हुआ है। चाहे हमारी सोच हो या व्यव्हार हम बदल गए है। आज हम इसके दोनो पहलुओं का विश्लेषण करने की कोशिश करेंगे । इसमें पहला पहलू हम मे जो मनोवैज्ञानिक बदलाव आया है आज उसको देखेंगे, अगले बार हम इसके आर्थिक परिणामों का अध्ययन करेंगे ।नोटबंदी से पहले हम लोग आर्थिक भ्रष्टाचार या सामाजिक भ्रष्टाचार को नीयती मान चुके थे । किसी भी काम को करने के लिए या करवाने के लिए हमे रिशवत लेना या देना शिष्टाचार का या जीवन का एक अंग बन चुका था । ये अब तक जो हमने बात की वो सर्वविधित थी और है ,पर इससे जादा समस्या ये थी कि हम लोग पैसे को नगद रूप मै संचय करने मै विश्वाश करते थे इससे पैसों का जो उपयोग मार्केट मै होना चाहिए लिक्विडिटी मेंटेन करने के लिए होना चाहिए वो नही होता था । इससे भारतीय रिजर्व बैंक को बार बार नए नोट छापने पड़ते थे इसका परिणाम ,ये होता था की कॉस्ट ऑफ कैपिटल या पूंजी की कीमत बहुत ज्यादा थी । पूंजी की तरलता बाधित होती रहती थी ये हुआ पहला ...

|| SHANIWAR SAMWAD || 04-11-2023

 We, Bhartiya people are strange, no one can understand us, world over all are fearing for earning security but we are free from worry of this problem. Recently, RBI issued a report in which same was quoted with data, the housing finance and car finance taken by citizens are increasing in compounding rate of 11% and 6% . This loans are long term in nature with high ticket size. The market and economy is resilient. Numbers of car dispatched for wholesale and retail sale is increasing  for last one year. The registry of properties are increasing with ready to move in properties are decreasing, so the new launching are increasing. All these are just indicators of mid income group people. We often talk with lower income group person, they are also very confident for their income or they think that  their income is going to increase not decrease. Which is reflected in their spending. It is not only spending  but they are investing in income generating asset. The liquid in...