|| शनिवार संवाद || 25-07-2026
रेलवे में बदलाव बहुत आ रहे हैं. पर जो भी बदलाव है वह भारत सरकार की बजेट से होरहा है. क्योंकि ऑपरेटिंग रेशों अभी भी नियंत्रित नहीं है. पिछले साल ये ९८.३२% है, जिससे रेलवे की अपने नेटवर्क को बढ़ाने के लिए पैसे नही है.
हमने भी रेलवे को हमेशा घाटे में चलाने के लिए मजबूर किया. हमने फ्रेट या गुड्स की जगह पैसेंजर को महत्व दिया. हम हर बजट में नई पैसेंजर ट्रेन की डिमांड करने या इसकी अपेक्षा ही करते थे.
पैसेंजर ट्रेन घाटे का सौदा है , पर इसका कोई इलाज नहीं क्योंकि इतने बड़े देश में एक ही नेशनल ट्रांसपोर्ट है जो मिडिल क्लास के लिए अफोर्डेबल है.
फ्रेट आपको पैसा देता है पर उसे हम अनकंपिटिटिव बना रहे है.
प्रायोरिटी गलत होना ये हमें एक सफेद हाथी पालने को मजबूर कर दिया, बजट ही सही आज हम अपनी प्रायोरिटी ठीक कर है.
फ्रेट के लिए अलग बजट और अलग ट्रैक हमें एक नई आशा देता है. पहले हमने कोंकण रेलवे को अलग कंपनी बनाया. पर हमारा बाबू कल्चर कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन को घाटे का सौदा बनाया और उसे रेलवे में मर्ज करा दिया.
अब जो बदलाव आ रहा है उसमें इन्हीं बाबू की सहभागिता पूरी है. पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर चालू हो गए है और मॉल की डुलाई बढ़ गई है. मॉल गाड़ी की स्पीड बढ़ गए है.
उत्तर भारत से गुड्स बंदरगाह तक तय वक़्त में पहुंच रहा है. जिससे आंतरिक व्यापार और एक्सपोर्ट बढ़ गया है.
डुलाई का समय जितना कम होगा उतना लाभ बढ़ेगा और रेलवे ज्यादा विश्वसनीय माध्यम बनेगा.
गुड्स की डुलाई को जो महत्व मिलना चाहिए उसे देने से पॉजिटिव परिणाम मिलेगा और मिलना चालू हो गया.
रेलवे अब इंडस्ट्री को साथ लेकर चल रही है उसका और पॉजिटिव परिणाम आएगा, जैसे कि रेलवे वैगन डिजाइन की छूट दी है. उससे जो भी डिजाइन बनेंगे वो गुड्स लॉस, जो कि ट्रांजिट में हो रहा था.
अगर गुड्स कंटेनर का इस्तेमाल ज्यादा होगा तो रेलवे का इस्तेमाल या टर्न अराउंड टाइम कम होगा.
अगर रेलवे को स्वयंपूर्ण बनाना है तो उसे लाभ कमाने की छूट होनी चाहिए सिर्फ समाज सेवा का माध्यम नहीं होना चाहिए, फ्री bee जो रेलवे के माध्यम से दी जा रही हैं उसे धीरे धीरे कम करना होगा. तभी इंडस्ट्री और रेलवे साथ साथ चल पायेंगे.
क्योंकि इसके पहले रेलवे का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है. पर वक्त के साथ चलना पड़ेगा रेलवे को जिससे इंडस्ट्री का पैसा आएगा और रेलवे को ऑपरेटिंग ratio पॉजिटिव हो जाएगा.
अपना पैसा जिस पर ब्याज रेलवे या सरकार को देना पड़ता है. इंडस्ट्री और रेलवे साथ आएंगे तो जरूरत के हिसाब से टेक्नोलॉजी और पैसा आएगा जो सस्ता और प्रोडक्टिव होगा.
बदलाव जरूरी है और वक्त पर होना चाहिए, रेलवे अपनी गलती सुधार रही है. परिणाम बेहतरीन होगा अगर रेलवे साथ न छोड़े तो.
Market Update 📰:
- 🇮🇳 Indian Market: Dalal street remained under pressure this week as rising oil prices, fresh U.S. tariff concerns, and escalating Middle East tensions weakened investor confidence. 📉 Banking and financial stocks led the decline after weaker Q1 earnings, while IT showed resilience in select sessions. Inflation worries and a softer rupee 💱 kept investors cautious. Markets will now focus on more Q1 earnings, global cues, and crude oil trends for the next direction.
- 📊 FII & DII activity: In the cash market, FIIs sold equities worth ₹7,182 Cr, while DIIs bought ₹8,637 Cr.
- 🌍 Global Market: Indices stayed volatile as escalating Middle East tensions lifted oil prices, raising fresh inflation concerns. This pushed bond yields higher and kept investors cautious. ⚠️While energy stocks gained, technology shares faced pressure amid AI spending worries. 💻⚡ Investors now shift their focus to upcoming central bank meetings, inflation data, and corporate earnings for the market's next direction.
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